नमस्ते दोस्तों!
आज सुबह-सुबह जैसे ही अख़बार खोला, जयपुर की अपनी शहर के बारे में एक खबर देखकर थोड़ा दिल बैठ गया। खबर थी सफाई की स्टार रेटिंग को लेकर, और ये पढ़कर कि हमारा प्यारा जयपुर 'थर्ड क्लास' में है, मन में कई सवाल उठे। आखिर क्यों? और कब तक?
याद है, पिछली बार हम ग्रेटर और हेरिटेज दोनों मिलकर टॉप-20 में बड़ी शान से आए थे। लेकिन इस बार, जो आंकड़े सामने आए हैं, वो वाकई सोचने पर मजबूर करते हैं। ग्रेटर निगम 16वें और हेरिटेज निगम 20वें स्थान पर खिसक गया है। पिछले साल हेरिटेज 17वें पर था और ग्रेटर 173वें पर... तो ये उतार-चढ़ाव क्यों?
खबर में ये भी लिखा है कि 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की श्रेणी में, हम प्रोग्रेसिव स्वच्छ शहर का अवार्ड भी नहीं जीत पाए। दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी की मौजूदगी में ये सम्मान समारोह हुआ, और हमारे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी और महापौर भी वहां मौजूद थे। सोचिए, कितना मायूस करने वाला पल रहा होगा!
लेकिन दोस्तों, आंकड़ों से ज्यादा मुझे उस बात ने छुआ जो खबर की हेडलाइन में लिखी थी: "टॉप पर तभी आएंगे, जब सफाई को संस्कृति बनाएंगे।" ये बात बिल्कुल सौ टका सच है!
सिर्फ निगम के कर्मचारियों या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है सफाई। ये हम सबकी जिम्मेदारी है। एक नागरिक के तौर पर जब तक हम ये नहीं समझेंगे कि अपने शहर को साफ रखना हमारी आदत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है, तब तक बातें ऐसी ही होती रहेंगी।
सामने जो तस्वीर दिख रही है, वो भी बहुत कुछ कहती है। कूड़े का ढेर, कचरा उठाने वाली गाड़ी... ये सब हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है, नाइट स्वीपिंग भी हो रही है, लेकिन क्या हम अपना योगदान दे रहे हैं?
आइए, हम सब मिलकर ये प्रण करें कि अब सिर्फ शिकायतें नहीं, बल्कि कुछ करेंगे। अपने घर से लेकर अपनी गली, अपने मोहल्ले तक, जहां भी रहें, सफाई का ध्यान रखें। क्योंकि जयपुर सिर्फ एक शहर नहीं, ये हमारी पहचान है, हमारा गौरव है।
अगर हम सब अपनी जिम्मेदारी समझ लें, तो वो दिन दूर नहीं जब हमारा जयपुर फिर से चमक उठेगा और सफाई की स्टार रेटिंग में टॉप पर होगा। क्या कहते हैं आप?
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